हमारा संस्थान आपको शुद्ध जड़ी-बूटियों और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार उपचार प्रदान करता है।
लक्षण: शारीरिक कमजोरी, घबराहट, और जल्दी वीर्यपात।
सुझाव: कौंच बीज, अश्वगंधा और सफेद मूसली का चूर्ण दूध के साथ लें।
लक्षण: रात में नींद के दौरान अनैच्छिक वीर्यपात।
सुझाव: ठंडे पानी से स्नान करें और गिलोय का रस शहद के साथ लें।
लक्षण: पेशाब के समय चिपचिपा पदार्थ निकलना और कमर दर्द।
सुझाव: चंद्रप्रभा वटी और शिलाजीत का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से करें।
लक्षण: जल्द थकान होना, काम में मन न लगना, आलस्य।
सुझाव: अश्वगंधा चूर्ण और शतावरी को गुनगुने दूध के साथ लें।
लक्षण: संतान प्राप्ति में बाधा, वीर्य का पतलापन।
सुझाव: सफेद मूसली, कौंच बीज और गोक्षुरा का नियमित सेवन।
लक्षण: घुटनों और जोड़ों में सूजन और असहनीय दर्द।
सुझाव: योगराज गुग्गुल और महानारायण तेल की मालिश।
लक्षण: तनाव की कमी, नसों में कमजोरी, संभोग के समय ढीलापन।
सुझाव: नियमित रूप से अश्वगंधा और श्री गोपाल तेल की मालिश करें। पौष्टिक आहार लें।
लक्षण: संभोग के दौरान समय से पहले वीर्यपात होना, मानसिक चिंता।
सुझाव: कौंच बीज और सफेद मूसली का चूर्ण गाय के दूध के साथ लें। प्राणायाम करें।
लक्षण: योनि से सफेद चिपचिपा पानी निकलना, कमर दर्द, शारीरिक कमजोरी।
सुझाव: लोध्रासव का सेवन और योनि प्रक्षालन के लिए त्रिफला पानी का उपयोग करें।
लक्षण: योनि मार्ग में संक्रमण, खुजली और जलन महसूस होना।
सुझाव: नीम के पानी से सफाई करें और पंचवल्कल काढ़ा का उपयोग करें।
लक्षण: बालों का तेजी से झड़ना, स्कैल्प का दिखना, पैच बनना।
सुझाव: भृंगराज तेल की मालिश और आंवला, शिकाकाई का नियमित प्रयोग करें।
लक्षण: बालों की जड़ों का कमजोर होना, चमक कम होना।
सुझाव: ब्राह्मी और जटामांसी युक्त तेल का उपयोग करें और आयरन युक्त भोजन लें।